हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Sunday, October 11, 2015
नज़्म #१६
शायद कुछ तो उस दिन जिन्दगी में बदल रहा था,
शायद कोई तो उस दिन खुद में संभल रहा था,
पर क्या पता वो शायद हो ना हो इस जिन्दगी में,
पर क्या पता वो जज़्बात फिर आये न आये अब बेरुखी में|
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