हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Sunday, October 11, 2015
कुछ तुकबंदिया # १७
न जाने कब जिंदगी के तराजू मे प्यार को नफरत से तोलने लगे,
न जाने कब छुपे अरमानों को किसी के सामने भी खोलने लगे,
न जाने कब हम इस कदर होने लगे|
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