Sunday, October 11, 2015

कुछ तुकबंदिया # १७

न जाने कब जिंदगी के तराजू मे प्यार को नफरत से तोलने लगे,
न जाने कब छुपे अरमानों को किसी के सामने भी खोलने लगे,
न जाने कब हम इस कदर होने लगे|

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