हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Sunday, October 11, 2015
काही मनातलं, कागदावर ओतलं - #१
मी तिची वाट बघत राहिलो, ती माझी वाट लावत राहिली, मी आमच्या नात्यात ख़त टाकत गेलो, आणि ती माझ्या आयुष्याची माती करत राहिली|
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