मेरी अँधेरी गलियों में एक दिया जला गयी वो,
मेरे बंद पड़ी धडकनों को आज फिर चला गयी वो|
जो टूटा था टुकड़ा जिंदगी का, आज जोड़ गयी वो
कमबख्त आज जाते जाते भी, दिल की बंदिशे तोड़ गयी वो
न जाने क्यों मेरे बंद अरमानों का फिर पिटारा खोल गयी वो,
मेरे प्यार भरे जज्बातों को ना जाने क्यों चीजों से तोल गयी वो
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