Monday, September 28, 2015

नज्म #१३

बस इतनी सी अब हमारी कहाणी हैं,
जो आपने जरुर सुनी किसीके जुबानी हैं,
कि कोहराम तो उसके लिए आज भी मचा देते बेझिझक, लेकिन अंजाम देखने के लिए अब वो न रही, और उसे बताने वालों के साथ हम ना रहे|

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