दिल सिकुड़ते हुए भी जिसका होता था भारी|
जो सबकी सुनकर ही तो जिया उम्र सारी||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
जो सोचता साथ जिन्दगी एक बने हमारी|
पर हाथ लगी आखिर जिसके मक्कारी||
.ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
उसे जिताने पहुँच जाता, जब जब वो हारी|
भगवान को भी जिसने चुनौतियां दे दी सारी||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
उसकी बहती खुशियों की जो हर पल सीता था क्यारी|
बदले में उसे आखिर तक फिर भी मिली धिक्कारी ||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
न बुझी जिसे कभी किसी की कोई समझदारी |
बस भागता रहा उसके लिए जो अपनी जिन्दगी सारी||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
लहू बहाया जिसने उसके आंसुओं से भी भारी|
और प्यार को ही समझ बैठा जो आखिरी दम तक होशियारी ||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
जो सबकी सुनकर ही तो जिया उम्र सारी||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
जो सोचता साथ जिन्दगी एक बने हमारी|
पर हाथ लगी आखिर जिसके मक्कारी||
.ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
उसे जिताने पहुँच जाता, जब जब वो हारी|
भगवान को भी जिसने चुनौतियां दे दी सारी||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
उसकी बहती खुशियों की जो हर पल सीता था क्यारी|
बदले में उसे आखिर तक फिर भी मिली धिक्कारी ||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
न बुझी जिसे कभी किसी की कोई समझदारी |
बस भागता रहा उसके लिए जो अपनी जिन्दगी सारी||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
लहू बहाया जिसने उसके आंसुओं से भी भारी|
और प्यार को ही समझ बैठा जो आखिरी दम तक होशियारी ||
ऐसा मैं,
प्रेम पुजारी |
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