Friday, September 25, 2015

नज्म #१२

मैं आज भी कुबूल करता हूँ, कि गिला-शिकवा करने से कुछ यूँ डरता हूँ,
जैसे वो अलबेला परिंदा डरता हैं पहली उड़ान अपनी भरने से पहले,
जैसे वो मदमस्त तितली डरती हैं अपनी आजादी धरने से पहले

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