Friday, September 25, 2015

बस कुछ यूँ ही लिखे शब्द

१. तैरना आता हो या नहीं ये तो वैसे ही बेकार की बातें हो जाती हैं,
जब नाव में छेद भी तुम ही ने कर रखे हो|

२. खड़ा तो उसके सामने उस दिन भी हो जाता जिस दिन वो निकल पडी थी,
लेकिन अडा रहूँ अब इतनी न हिम्मत बची थी अब और न ही ताकद |

३. जिन्दगी में मौसम का हाल कुछ यूँ हैं आजकल,
कि बारिश तक्कलुफ़ ले इससे पहले ही तूफ़ान उजाड़ जाते हैं हमारा बसेरा.

४. उस वक़्त की तलाश में, जब छोड़ दिया जीना भागते हुए एक 'काश' के

५. Optimism की सिट्टी बिट्टी तो हम तभी गुल कर देते हैं,
जब 'क्या बोया जिन्दगी में' पूछने की बजाय 'क्या उखाड़ लिया' ये पूछ बैठते हैं!

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