Friday, September 25, 2015

कुछ तुकबंदिया #१४

तेरी बची हुई धुंधली यादों को पकड़कर ही आज भी rhyme कर लेता हूँ, मिलना तो मुश्किल, पर इसी बहाने आजकल तेरे नाम अपना time कर देता हूँ |

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