Monday, October 27, 2014

कुछ तुकबंदिया -#8

एक दिन फिर ऐसी होगी सुबह
की चाँद भी ख़ुशी से ढल जायेगा
उजाला इतना होगा चारो ओर कि
मोहब्बत का नया संदेश जरुर आएगा

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