हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Monday, October 20, 2014
कुछ तुकबंदिया - #3
कुछ अरमान जो बचे थे
सब आंसुओं में बह गए
कुछ लफ्ज़ जो कहने थे तुमसे
बस दिल में ही रह गए
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