हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Tuesday, October 21, 2014
नज़्म - #7
अब भी रात बाकी हैं,
मेरे साथ बसर कर लो जो तुम।
अब भी साँस बाकी हैं,
मेरे साथ सफ़र कर लो जो तुम।।
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