Tuesday, October 21, 2014

कुछ तुकबंदिया - #४

मेरा मन करता हैं आज भी बहुत एक मजाक समझकर सब भूल जाऊ लेकिन मजाक न हुआ ये तो सच्चाई हैं कैसे समझाऊ कितनी इसकी गहराई हैं


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