हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Tuesday, October 21, 2014
नज़्म - #6
एक कमरा मेरे ख़्वाबों का भी हैं
जिसमे ढेर लगे हैं मेरे अरमानों के
एक कमरा मेरे ख्वाइशों का भी हैं
जिसमे ढेर लगे हैं मेरी टूटी गुंजाइशों के
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