Tuesday, October 21, 2014

नज़्म - #6

एक कमरा मेरे ख़्वाबों का भी हैं जिसमे ढेर लगे हैं मेरे अरमानों के एक कमरा मेरे ख्वाइशों का भी हैं जिसमे ढेर लगे हैं मेरी टूटी गुंजाइशों के

No comments:

Post a Comment