Monday, October 20, 2014

नज्म - #५

क्यों उदास सी हैं ये जिन्दगी क्यों निराश सी हैं ये जिन्दगी इतनी मद्दम मद्दम चलती हैं फिर भी हताश सी क्यों हैं ये जिन्दगी

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