हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Monday, October 20, 2014
नज्म - #५
क्यों उदास सी हैं ये जिन्दगी
क्यों निराश सी हैं ये जिन्दगी
इतनी मद्दम मद्दम चलती हैं
फिर भी हताश सी क्यों हैं ये जिन्दगी
No comments:
Post a Comment