Tuesday, October 21, 2014

कुछ तुकबंदिया - # 5


सोचता हूँ मैं कभी कभी कि
जो तुम न होती तो क्या होता मेरा
फिर सच्चाई कानों में कह जाती कि
तुम्हारी बदौलत ही तो हैं ये हाल मेरा

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