हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Tuesday, October 21, 2014
कुछ तुकबंदिया - # 5
सोचता हूँ मैं कभी कभी कि जो तुम न होती तो क्या होता मेरा फिर सच्चाई कानों में कह जाती कि तुम्हारी बदौलत ही तो हैं ये हाल मेरा
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