Monday, October 20, 2014

नज़्म - #२

तेरा नामोनिशां मिट जाए मेरे दिल से
तेरी परछाई भी न गुजरे मेरे करिब से
बस इतना ही चाहता हूँ में अब तो
दूर जो चले गयी हो, तो दूर ही रहो मुझसे




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