Wednesday, October 22, 2014

तेरा नाम

तेरा नाम भी जुबां पर आता हैं
तो मेरी रूह काँप उठती हैं
तेरा जिक्र भी कही सुनता हूँ
तो मेरे दिल की धड़कने बढती हैं

तेरी महक भी जो आ जाये
तो मेरा रोम-रोम चहक उठता हैं
तुझे मुस्कुराता जो मैं कभी देख लूँ
तो जैसे साँसों का आना रुख सा जाता हैं

ये कैसी मेरी जिंदगी कर दी हैं तुन्हें
जहा भी जाता हूँ पागलों सा मुस्काता हूँ
न वजह होती हैं ना जगह होती हैं
फिर भी दिल से कोई गाना गाता हूँ

मस्त मैं दीवाना सा हो जाता हूँ
जब भी होटों पर तेरा नाम लाता हूँ
इस दर्दभरी जिन्दगी से आराम पाता हूँ
जब भी होटों पर तेरा नाम लाता हूँ

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