Monday, October 20, 2014

नज़्म - #३

सोचता हूँ जो कभी कभी की तुम न होती तो क्या होता? क्या सूरज निकलना बंद कर देता? या चाँद रातों को रोशन ना करता? नहीं. बस मैं भी बहुत खुश होता
रातों को चैन से मैं भी सोता
दिन भर बैठकर न कभी रोता
तुझसे न मिलता तो मैं भी आज खुश होता
मैं भी आज खुश होता 



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