Wednesday, October 22, 2014

एक साल

एक साल बित गया हैं, जब तुमको सब बताया था
अपने दिल में जब तुमको जो मैंने बसाया था
जिस प्यार से डरता था वो तुमको जताया था
एक साल बित गया हैं, जब तुमको पहले हंसाया था

एक साल में क्या क्या हो गया हैं ये सब नहीं जानते
कितना जुड़ गया हूँ मैं तुमसे ये सब नहीं मानते
पर इन सब के लिए नहीं था मेरा प्यार कभी
मेरी सच्चाई जो भी हो, मेरा तो संसार हैं तुझमे अभी

चाहूँ जितना भी दूर चला जाऊ मैं तुम से अब तो
सच तो बस यही हैं की तुमसे ही मेरी साँसे है अब तो
वो सूरज भी क्या जो निकले अब तुम्हारे बिना रोज
वो तारे भी क्या जो चमके अब तुम्हारे बिना रोज

ये सब तो अब सुना सुना हैं मेरे लिए
अपने भी जो थे वो पराये हैं मेरे लिए
बस तुमको ही सब कुछ माना था मैंने तो
तुम ही मेरा रब और तुम ही मेरा सब अब तो

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