Tuesday, October 21, 2014

जब

जब दूरियाँ मिलों की होती हैं
जब फाँसले दरमियाँ होते हैं
तब वो भी वहाँ पे रोती हैं
और हम भी यहाँ पे रोते हैं


जब चोट हमे यहाँ लगती हैं
जब लहू हमारा यहाँ बहता हैं
तब वोह भी पे वहाँ पे रोती हैं
और हम भी यहाँ पे रोते हैं


जब मोहब्बत रुसवा होती हैं
जब दिल टूट रहे होते हैं
तब वो भी वहाँ पे रोती हैं
और हम भी यहाँ पे रोते हैं


जब सपने पतझड़ से गिरते हैं
जब आँसू भी सूखे होते हैं
तब वो भी वहाँ पे रोती हैं
और हम भी यहाँ पे रोते हैं


जब आँखें दर्द में होती हैं
जब दुनिया सो रही होती हैं
तब वो भी वहाँ पे रोती हैं
और हम भी यहाँ पे रोते हैं

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