हम वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगता हैं| अब ना डर हैं जमाने का ना डर हैं मुसीबत के आने का | बस मन करे वो लिखते हैं, ना अब छिपते हैं ना छिपाते हैं | यहाँ संग्रह हैं तुकबंदियों का, कोशिश रहेगी की जब जब मौका मिले, नए नए डालता रहूँ|
Monday, October 20, 2014
नज़्म - #४
कही मेरे ये दिन ना ढल जाए
तुम्हारे वापस लौटने से पहले
कही साँसों की ये डोर न जल जाए
एक आखरी दीदार होने से पहले
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