Tuesday, October 21, 2014

तो कितना अच्छा होता

कोई प्यार हमसे कर लेता 
तो कितना अच्छा होता 
कोई नफरत हमसे न करता 
तो कितना अच्छा होता 

कोई इकरार हमसे कर देता
तो कितना अच्छा होता
कोई इनकार हमे न करता
तो कितना अच्छा होता

कोई साथ हमारे चल देता
तो कितना अच्छा होता
कोई दूर हमसे ना जाता
तो कितना अच्छा होता

कोई हाथ हमारा थाम लेता
तो कितना अच्छा होता
कोई ठोकर मार न जाता
तो कितना अच्छा होता

कोई संग हमारे भी हँसता
तो कितना अच्छा होता
कोई बिन हमारे भी रोता
तो कितना अच्छा होता

कोई जिंदगीभर हमारा होता
तो कितना अच्छा होता
कोई पलभर  भी हमसे न बिछड़ता 
तो कितना अच्छा होता

कोई शुरुआत नयी संग हमारे करता
तो कितना अच्छा होता
कोई बात बीती न करता
तो कितना अच्छा होता

कोई दिल में अपने हमे बसाता
तो कितना अच्छा होता
कोई पैरों की धुल हमे न मानता
तो कितना अच्छा होता

काश कोई तो ऐसा होता
तो कितना अच्छा होता
तो कितना अच्छा होता 

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